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    सचित्र श्री निरयावलिका तथा श्री विपाक सूत्र

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    विवरण

    इस जिल्द में एक साथ छह आगम हैं। निरयावलिया आदि पाँच उपांग तथा ग्यारहवाँ अंग विपाक श्रुत। विपाकश्रुत में हिंसा आदि अशुभ कर्मों का कटुफल तथा दान, तप आदि शुभ कर्मों का शुभ फल बताने वाले रोचक चरित्र हैं।

    उत्पाद विशेष विवरण
    Author / Publicationश्री अमर मुनि
    भाषाहिंदी