(तर्ज : बाबुल का ये घर बहना) 

 

दादा तुमसे मिलने का, सत्संग ही बहाना है-२ 

दुनियाँ वाले क्या जाने, मेरा रिश्ता पुराना है-२ 

                     || अन्तरा || 

कलियों में ढूंढा तुम्हें, फूलों में पाया है होऽऽऽ-२ 

तुलसी के पत्तों में, मेरे दादा का ठिकाना है-२ 

 

सूरज में ढूंढ़ा तुम्हें, चंदा में पाया है होऽऽऽ-२ 

तारों कीऽऽऽ-२ झिलमिल में, मेरे दादा का ठिकाना है-२ 

 

दुनियाँ में ढूंढा तुम्हें, मालपुरा में पाया है होऽऽऽ-२ 

मालपुरा के मन्दिर में मेरे दादा का ठिकाना है-२ 

 

नवापारा में ढूंढा तुम्हें, पालीताणा में पाया है होऽऽऽ-२ 

नवापारा के मन्दिर में मेरे दादा का ठिकाना है-२