ऋषभजी बोलावे छे, एना सपना आवे छेजे एना थई जावे छे, एना ए थई जावे छे.ऋषभजी बोलावे छे ...सपनामां एनाथी वातो थाय; आंख खूले त्यां सौ पहेला देखाय,
जगचिंतामणि जगगुरु, जगत शरण आधार;अढार कोडाकोडी सागरे, धरम चलावणहार ...अषाढ वदि चोथें प्रभु, स्वर्ग थी लीये अवतार;चैतर वदि आठम दिने, जनम्या जगदाधार रे ...