Maharaj Sahab Ashtmangal Table
यह महाराज साहब अष्टमंगल टेबल विशेष रूप से साधु-साध्वीजी के उपयोग को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जहाँ इस पर थावणी रखकर ग्रंथों का पाठ किया जाता है। लकड़ी पर की गई सुंदर नक्काशी और अष्टमंगल प्रतीकों की उपस्थिति इसे अत्यंत पवित्र और पारंपरिक स्वरूप देती है। इसके चारों ओर लगी छोटी घंटियाँ एक शांत और दिव्य वातावरण बनाती हैं, जो स्वाध्याय के समय एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होती हैं। यह टेबल केवल उपयोग की वस्तु नहीं, बल्कि जैन परंपरा, अनुशासन और साधना का प्रतीक है।