तत्त्वार्थ सूत्र आचार्य उमास्वाति द्वारा रचित जैन धर्म का मूल ग्रंथ है। यह ग्रंथ जीवन, धर्म और मोक्ष के सिद्धांतों को सरल सूत्रों में प्रस्तुत करता है। इसमें सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र का महत्व स्पष्ट किया गया है। तत्त्वार्थ सूत्र को जैन दर्शन का सार्वभौमिक मार्गदर्शक माना जाता है।
सामायिक समता की साधना जैन धर्म में आत्मशुद्धि और संतुलन का महत्वपूर्ण अभ्यास है। यह 48 मिनट की साधना साधक को समभाव, करुणा और आंतरिक शांति की ओर ले जाती है। सामायिक के दौरान व्यक्ति सभी जीवों के प्रति समान दृष्टि रखता है और अहिंसा का पालन करता है। यह साधना आत्मिक अनुशासन और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर...