आदिनाथ प्रभु हर रूप में मिल जाते हैं, मौन, आहट या मुस्कान में। जीवन कर्मों की खेती है, जो बोएगा वही काटेगा। नेकी बाँटने वाला स्वयं भी सुगंधित होता है। सच्चा तीर्थ बाहर नहीं, भीतर की श्रद्धा और साधना में है।
जिनवाणी जैन धर्म में आत्मा की माँ और मोक्ष का द्वार कही जाती है। यह भगवान के उपदेशों और आगमों का दिव्य स्वरूप है। जिनवाणी साधक को सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र की ओर मार्गदर्शन करती है। इसका संदेश है, जिनवाणी के अध्ययन से आत्मा शुद्ध होकर मोक्षमार्ग पर अग्रसर होती है।