भगवान नेमिनाथ जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर थे, जिनका जन्म शौरीपुर में हुआ और वे श्रीकृष्ण के चचेरे भाई थे। विवाह-मंडप जाते समय बाड़े में बंद पशुओं की करुण चीख सुनकर उनके मन में तत्काल वैराग्य उत्पन्न हो गया और उन्होंने सारी बारात वहीं छोड़ दी।
मेतार्य मुनि, भगवान महावीर के शिष्य, एक अछूत परिवार में जन्मे पर साधुता में सबसे ऊँचे उठे। एक सुनार ने उन पर झूठा आरोप लगाया, चमड़े की रस्सी से बाँधकर धूप में छोड़ दिया। जिस पक्षी की जान बचाने के लिए उन्होंने चुप्पी साधी, उसी चुप्पी ने उन्हें केवलज्ञान दिया। अहिंसा का यह सबसे अनोखा रूप है जहाँ अपनी जान...