दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,यहां से गर जो हारा, कहां जाऊंगा सरकार।
सुख में प्रभुवर तेरी याद ना आयी,दुःख में प्रभुवर तुमसे प्रीत लगाई।सारा दोष हैं मेरा, मैं करता हूं स्वीकार,यहां से गर जो हारा, कहां जाऊंगा सरकार।
मेरा तो क्या हैं, मैं तो पहले से हारा,तुमसे ही पूछेगा ये संसार सारा।डूब क्यों नैय...
दादा ने संभाला था (२)कभी तो ये दादामाझी बन्न जाते हैकभी तो ये दादा साथी बन्न जाते है