पर्युषण का सार है आत्मशुद्धि और क्षमा। क्षमावाणी में हम अपने द्वारा किए गए दोषों और अपराधों के लिए क्षमा माँगते हैं। यह अहिंसा, करुणा और समता का अभ्यास है, जो आत्मा को हल्का करता है। संदेश यही है, क्षमा से ही क्रोध, द्वेष और कर्मबंधन का अंत होता है।
जैन धर्म में कंदमूल (जड़ वाली सब्जियाँ) जैसे आलू, प्याज और लहसुन का सेवन निषिद्ध है। इनमें अनगिनत सूक्ष्म जीव रहते हैं, जिन्हें उखाड़ने पर हिंसा होती है। इनका सेवन इंद्रियों को उत्तेजित करता है और साधना में बाधा डालता है। संदेश यही है, अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि के लिए कंदमूल का त्याग आवश्यक है।