हे अविनाशी ! नाथ निरंजन ! साहिब मारो साहिब साचो; हे शिववासी! तत्त्वप्रकाशी! साहिब मारो साहिब साचो ।
रात है आई तारे मुस्काएमां की गोदी में सपने आएधर्म की लोरी कानों में बहे प्रभु की कहानी दिल में कहे