कल्हारा पारस मोह भंजी, कालहारा बनी जाजो,
निरंजनोना नगरमां, एकवार मुजने लड़ जाजो,
जैनाबादने भृगुकच्छ तारा तीर्य जगमां जाणीता,
श्री "कल्हारा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [0]

गंधारनगरे बिराजता हे गंधहस्ति समा विभु.
अमृत जरे तुज नयणथी, ने वयणथी पारसप्रभु,
तुज दर्शनथी सहु भविकना, संताप ताप समी जता,
श्री "अमीजरा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [e]

प्रगट प्रभावी नाम तारुं, नाथ साचुं होय जो,
कलिकालमां मुजने प्रभुजी, मुक्ति सुख देखाडजो,
तुज नाम सत्य ठरे ज छे, मुज आतम आनंदता,
श्री "प्रगटप्रभावी" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [९]

काचा सुतरना तांतणे जे कूपमांथी प्रगटता,
वेणुतणा प्रभुजी छतां लोढासमा जे बनी जतां,
पद्मासनार्थे शोभता दर्भावतीमां राजता,
श्री "लोढण" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१.]

है विमल पारस विमल करों, मुज कर्म मल उच्छेदीने,
मुज ह्यदय कमले वास करजो, अवगुणो सहु भेदीने,
तुज नयण कमले पेखीने मुज मन भमर ललचाय छे,
श्री "विमल" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [e१]


अतीत चोवीसी तणा नेमि प्रभु उपदेशथी,
आषाठी श्रावक पूजता नीलम तणा प्रभु पार्श्वजी,
नागार्जुन ने आठमां बलदेवजी पण पूजता,
श्री "स्थंभन" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१२]