Wednesday, 4 February, 2026
chota sa ghar
आंख सुबह को जब मैं खोलूं
सबसे पहले तू दिख जाए ||
तुझसे पहले चांद को देखूं
ऐसी कोई शाम ना आए सुनवीर
मेरे महावीर मेरे ||
तुझको को मैं पा सकूं
इस जन्म बस इतनी उम्र चाहिए ||
मुझे तो एक छोटा सा घर चाहिए
हो जिसमें तेरा प्यारा सा दर चाहिए ||
जमाना चाहे कितना भी मैं घूम लूं
आखिर में तेरे चरणों में सर चाहिए

