जब से थामा है तूने मेरे हाथ को,
में भूल गया सारी क़ायनात को ... १२)
के तेरे बिना कोई भी नहीं मेरा ... (२)
अब तेरे बिना कोई भी नहीं मेरा ...
अब तेरे बिना कोई भी नहीं ...


मिटा दिया है तूने अब सारे अंधियारे को,
रोशन किया है तूने मेरे हर गलियारे को ... (२)
अंधेरे के घेरे से, तारा जन्मो के फेरे से ...
के तेरे बिना कोई भी नहीं मेरा ... (२)
अब तेरे बिना कोई भी नहीं मेरा ...
अब तेरे बिना कोई भी नहीं ...


निश्चय किया है मैंने बदलूंगा इस जीवन को,
चाहे जितना मुश्किल हो जानूंगा में भी खुद को .. (२)
देना है मेरा साथ तुझे, आएगी तेरी याद मुझे ...
के तेरे बिना कोई भी नहीं मेरा ... (२)
अब तेरे बिना कोई भी नहीं मेरा ..
अब तेरे बिना कोई भी नहीं ... 


Source: Harshit Shah