पर्वाधिराज पर्युषण यह देखो,
लौट के फिर से है आया
समता दया और मैत्री भाव का,
संग मिस्टर है संदेश लाया (2)
आतम में तप के,
दीप जले है,
भक्ति का रंग है छाया
जग हर्षाया है ...
आया है पर्युषण पर्व महान
यह एक पर्व नहीं ...
यह तो है हम ज़ैनों का अभिमान (2)
जग मग जग मग,
देखो सजी है,
आंगी मेरे जिनवर की
दीप जले है,
तोरण बांधे है,
सजी दहलीज़ हर एक घर की (2)
८ दिनों का है यह महोत्सव
८ दिनों का है यह महोत्सव
हर मन में आनंद समाया
जग हर्षाया है ...
आया है पर्युषण पर्व महान
यह एक पर्व नहीं ...
यह तो है हम ज़ैनों का अभिमान (2)
जीवदया से,
पुण्य कमाये,
कर्मों को मिलके खपाये
चरित्र आत्माओ,
के ज्ञान से,
जीवन को उत्तम बनाये (2)
प्रभु के दर पे झूमें और गाये
प्रभु के दर पे झूमें और गाये
भक्ति का मौसम है आया
जग हर्षाया है ...
आया है पर्युषण पर्व महान
यह एक पर्व नहीं ...
यह तो है हम ज़ैनों का अभिमान (2)
Source: Dhairya Rathod


