जय जगदीश्वर अति अलवेसर वीर प्रभु राया
पतित 'उद्धरण भव भय भंजण बोध बीज पाया
जय जय जिन राया, आरती करूं मन भाया,
होय कंचन काया जय जय जिन राया।
Library > आरती और मंगल दीपक
25 October, 2023
25 October, 2023
जय जय जगदीश जिनेसर जग तारन राजा
धन धन किरति तेरी इन्द्र करत बाजा
जय जय अविकारा तुम जग आधारा
आरती अमर उतारा भव आरती टारा। जय...
25 October, 2023
स्वः श्रियम् श्रीमद्ऽर्हन्तः, सिद्धाः सिद्धि पुरीपदम् ।
आचार्या : पंचाचार, वाचकां वाचनां वराम् ।।1।।
साधवः सिद्धि साहाय्यं, वितन्वन्तु विवे किनाम् ।
मंगलानां च सर्वेषां, आद्यं भवति मंगलम् ||2||


