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स्तोत्र एवं मंत्र
जैन शास्त्र श्रृंखला  ·  मूलभूत शिक्षा

णमो अरिहंताणं · णमो सिद्धाणं · णमो आयरियाणं
णमो उवज्झायाणं · णमो लोए सव्व साहूणं

नवकार मंत्र संपूर्ण अर्थ
एवं महत्व

जैन धर्म की सबसे पवित्र प्रार्थना — पाँच नमस्कार, पाँच सत्य, और मोक्ष का एक अटल मार्ग। चारों सम्प्रदायों में समान रूप से स्वीकृत यह महामंत्र हर जैन की आत्मा की आवाज़ है।

सम्प्रदाय : ✦ चारों सम्प्रदाय दिगम्बर श्वेताम्बर स्थानकवासी तेरापंथी

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जैन धर्म में कोई भी प्रार्थना नवकार मंत्र से अधिक सार्वभौमिक, अधिक हृदयस्पर्शी और अधिक दार्शनिक रूप से गहन नहीं है। यह वही प्रार्थना है जो एक जैन बालक सबसे पहले सीखता है, और जो अंतिम समय में उसके होठों पर होती है।

इसे नमोकार मंत्र, पंचपरमेष्ठी मंत्र या महामंत्र भी कहते हैं। इसमें पाँच नमस्कार हैं जो किसी व्यक्ति को नहीं, किसी देवता को नहीं, बल्कि पाँच परम आध्यात्मिक अवस्थाओं को समर्पित हैं, जिन्हें प्रत्येक आत्मा प्राप्त कर सकती है।

यही इस मंत्र की अद्वितीयता है। यह गुणों की वंदना करता है, व्यक्तियों की नहीं। और इसी एक दृष्टि में जैन दर्शन की समग्र प्रतिभा निहित है।

संपूर्ण नवकार मंत्र — प्राकृत मूल

णमो अरिहंताणंNamo Arihantānam णमो सिद्धाणंNamo Siddhānam णमो आयरियाणंNamo Āyariyānam णमो उवज्झायाणंNamo Uvajjhāyānam णमो लोए सव्व साहूणंNamo Loe Savva Sāhūnam
एसो पंच णमोक्कारो · सव्व पावप्पणासणोEso Pancha Namokkāro · Savva Pāvappanāsano मंगलाणं च सव्वेसिं · पढमं हवइ मंगलंMangalānam Cha Savvesim · Padhamam Havai Mangalam

यह अंतिम दो पंक्तियाँ "यह पाँच-नमस्कार सभी पापों का नाश करता है और समस्त मंगलकारी वचनों में प्रथम एवं सर्वश्रेष्ठ है" परंपरागत रूप से मंत्र के साथ जोड़ी जाती हैं।

पाँच पद — एक-एक की व्याख्या

नवकार मंत्र की प्रत्येक पंक्ति को पद कहते हैं। पाँचों पद पाँच परम आत्माओं पंचपरमेष्ठी को नमन करते हैं।

णमो अरिहंताणं
NAMO ARIHANTĀNAM — अरिहंतों को नमस्कार

अरिहंत अर्थात् आंतरिक शत्रुओं के विजेता — वे आत्माएँ जिन्होंने क्रोध, मान, माया और लोभ चारों कषायों को जीतकर केवलज्ञान प्राप्त किया। भगवान महावीर सहित चौबीसों तीर्थंकर सर्वोच्च अरिहंत हैं।

णमो सिद्धाणं
NAMO SIDDHĀNAM — सिद्धों को नमस्कार

सिद्ध वे आत्माएँ हैं जो समस्त कर्मों को नष्ट कर मोक्ष प्राप्त कर चुकी हैं। वे सिद्धलोक में अनंत ज्ञान और अनंत आनंद की अवस्था में सदा निवास करती हैं।

णमो आयरियाणं
NAMO ĀYARIYĀNAM — आचार्यों को नमस्कार

आचार्य जैन मुनि-संघ के प्रमुख हैं। वे चतुर्विध संघ का मार्गदर्शन करते हैं और शास्त्र-परंपरा की रक्षा करते हैं।

णमो उवज्झायाणं
NAMO UVAJJHĀYĀNAM — उपाध्यायों को नमस्कार

उपाध्याय वे वरिष्ठ मुनि हैं जो अन्य साधुओं को जैन आगमों की शिक्षा देते हैं और तीर्थंकरों की वाणी को जीवित रखते हैं।

णमो लोए सव्व साहूणं
NAMO LOE SAVVA SĀHŪNAM — सभी साधुओं को नमस्कार

साधु और साध्वियाँ वे हैं जिन्होंने पाँच महाव्रत धारण किए हैं। "लोए" शब्द इसे सार्वकालिक बनाता है — किसी भी काल, किसी भी स्थान के समस्त साधुओं को समर्पित।

इस प्रार्थना का दार्शनिक आधार

"नवकार मंत्र किसी वरदान या सांसारिक सुख की याचना नहीं करता। यह मुक्ति की गुणवत्ता के समक्ष झुकता है और इस झुकने में साधक की चेतना उस मार्ग के साथ जुड़ जाती है।"

तत्त्वार्थ सूत्र (अध्याय १), उमास्वाति/उमास्वामी के दर्शन पर आधारित

अधिकांश धार्मिक प्रार्थनाएँ कुछ माँगती हैं। नवकार मंत्र कुछ नहीं माँगता। यह एक शुद्ध श्रद्धा-क्रिया है — अपनी आत्मा को सर्वोच्च अवस्थाओं के साथ संरेखित करने का सचेत प्रयास।

तत्त्वार्थ सूत्र स्थापित करता है कि सम्यक् दर्शन मोक्ष-मार्ग की नींव है। नवकार मंत्र का सजगतापूर्वक पाठ सम्यक् दर्शन की साधना है।

इसमें किसी का नाम क्यों नहीं?

नवकार मंत्र में भगवान महावीर का नाम नहीं है। यह सर्वथा जानबूझकर है। जैन धर्म मानता है कि जो पवित्र है वह अवस्था है, व्यक्ति का नाम नहीं। जब आप णमो अरिहंताणं बोलते हैं तो आप हर उस अरिहंत को नमस्कार करते हैं जो कभी था, जो अभी है और जो कभी होगा।

चारों सम्प्रदायों में स्वीकृति

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दिगम्बर

नित्य पूजा और समस्त आराधना का आरंभ नवकार मंत्र से होता है।

🌿
श्वेताम्बर

चैत्यवंदन, प्रतिक्रमण और समस्त पूजा-विधियों में इसका पाठ होता है।

📿
स्थानकवासी

मौखिक परंपरा में नवकार मंत्र सर्वोच्च जीवंत प्रार्थना है।

🕊️
तेरापंथी

प्रेक्षा ध्यान सत्रों का आरंभ नवकार मंत्र से होता है।

नवकार मंत्र का जाप कैसे करें

स्थिरता प्राप्त करें। सीधी रीढ़ के साथ बैठें और तीन धीमी साँसें लेकर मन को शांत करें।

समझकर जपें। प्रत्येक पद को धीरे-धीरे बोलते हुए उसका अर्थ मन में उभरने दें।

माला का उपयोग करें। १०८ मनकों की जैन माला से १०८ आवर्तन करें।

उत्तम समय। प्रातःकाल, पूजा के समय, भोजन से पूर्व और सोने से पहले।

मानसिक जाप। बिना ओष्ठों के हिलाए मन में आवर्तन — शुद्ध चेतना का शुद्ध चेतना को नमस्कार।

✦   क्या आप जानते हैं?

  • नवकार मंत्र अर्धमागधी प्राकृत में रचित है — वही भाषा जो भगवान महावीर ने प्रयुक्त की।
  • पाँच पदों में कुल ३५ अक्षर हैं जो जैन परंपरा में अत्यंत शुभ संख्या मानी जाती है।
  • यह किसी भी भारतीय धर्म की एकमात्र प्रार्थना है जो आध्यात्मिक अवस्थाओं की वंदना करती है, नामित देवताओं की नहीं।
  • आचार्य महाप्रज्ञ ने इसे एक संपूर्ण प्रेक्षा ध्यान तकनीक बताया।
  • अंतिम दो पंक्तियाँ आवश्यक सूत्र से हैं — श्वेताम्बर परंपरा के प्राचीनतम आगमों में से एक।
✦   मुख्य सार

नवकार मंत्र याचना नहीं, एक घोषणा है। इसे जपते हुए आप कहते हैं: मैं उस सर्वोच्च को पहचानता हूँ जो आत्मा प्राप्त कर सकती है। मैं उस उपलब्धि के समक्ष नतमस्तक होता हूँ।

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स्रोत एवं संदर्भ सूची

इस लेख की सभी सामग्री प्रमाणिक जैन शास्त्रों और मान्यता प्राप्त विद्वानों की कृतियों पर आधारित है।

📘
प्राथमिक शास्त्र · सर्व-सम्प्रदाय
तत्त्वार्थ सूत्र

उमास्वाति/उमास्वामी रचित · चारों सम्प्रदायों द्वारा स्वीकृत। जैन धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण दार्शनिक ग्रंथ।

📗
प्राथमिक आगम · श्वेताम्बर
आवश्यक सूत्र

श्वेताम्बर आगम परंपरा का प्राचीनतम ग्रंथ। नवकार मंत्र की अंतिम दो पंक्तियाँ इसी में संकलित हैं।

📕
प्राथमिक शास्त्र · दिगम्बर
समयसार

आचार्य कुंदकुंद रचित। शुद्धात्मा के स्वरूप पर सर्वाधिक पूजित दिगम्बर ग्रंथ।

📙
विद्वत्-अनुवाद
That Which Is — तत्त्वार्थ सूत्र

अनुवाद: नथमल टाटिया · HarperCollins, १९९४। सर्वाधिक प्रामाणिक अंग्रेजी अनुवाद।

📚
शोध-ग्रंथ
The Jains — पॉल डंडास

Routledge, २०००। जैन इतिहास और सिद्धांत का सर्वाधिक सम्मानित अकादमिक अवलोकन।

📖
शोध-ग्रंथ
Jaina Philosophy and Religion

नथमल टाटिया · Motilal Banarsidass, १९९४। पंचपरमेष्ठी के सिद्धांत-विवेचन के लिए।

🕊️
तेरापंथी संदर्भ
Thus Spake Lord Mahavira

संकलन: आचार्य महाप्रज्ञ · जैन विश्व भारती, लाडनूँ।

🌐
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