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Library > जैन ज्ञान श्रृंखला
प्रवचनसार की शिक्षाएं आचार्य कुंदकुंद का अध्यात्म-सागर

प्रवचनसार आचार्य कुंदकुंद द्वारा रचित जैन धर्म का गहन आध्यात्मिक ग्रंथ है।
इसमें आत्मा के शुद्ध स्वरूप, कर्मबंधन और मोक्षमार्ग का विवेचन मिलता है।
ग्रंथ साधक को आत्मनिरीक्षण, सम्यक दर्शन और आत्मशुद्धि की ओर प्रेरित करता है।
संदेश यही है - आत्मा को पहचानो, कर्मों से मुक्त होकर मोक्ष की ओर बढ़ो।

प्रतिक्रमण की विधि

प्रतिक्रमण जैन धर्म की दैनिक आत्मशुद्धि की साधना है। इसमें दिनभर के दोषों,
पापों और अशुद्धियों का आत्मावलोकन किया जाता है। विधि में अलोचना (स्वीकार),
प्रतिक्रमण (पश्चाताप), प्रत्याख्यान (भविष्य में त्याग का संकल्प) और क्षमा प्रमुख अंग हैं।
इसका संदेश है, आत्मनिरीक्षण और क्षमा से आत्मा को शुद्ध कर मोक्षमार्ग की ओर बढ़ना।

जैन आहार संस्कृति

जैन आहार संस्कृति का मूल आधार है अहिंसा और जीव-दया।
हर थाली में करुणा, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश निहित होता है।
यह भोजन केवल शरीर का पोषण नहीं, बल्कि आत्मा की साधना का साधन है।
संदेश यही है, करुणा और संयम से युक्त आहार ही मोक्षमार्ग का सहायक है।

नवपद ओली शाश्वत साधना का महापर्व

नवपद ओली जैन धर्म का महान तपोत्सव है।
यह 18 दिन की साधना आत्मशुद्धि और संयम का महापर्व है।
साधक नौ पदों, अरहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यक दर्शन, 
सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र और तप का स्मरण करता है।


पर्युषण की तैयारी बाहर से नहीं बल्कि भीतर से!

पर्युषण जैन धर्म का आत्मशुद्धि और तप का महापर्व है।
इसकी तैयारी बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि भीतर की साधना से होती है।
उपवास, स्वाध्याय और क्षमा इसका मुख्य आधार हैं। संदेश यही है,
आत्मा को शुद्ध कर मोक्षमार्ग पर अग्रसर होना।

आचार्य हेमचंद्र कलिकाल सर्वज्ञ

आचार्य हेमचंद्र जैन धर्म के महान आचार्य और कलिकाल सर्वज्ञ कहलाए जाते हैं।
उन्होंने व्याकरण, साहित्य, दर्शन और राजनीति सहित अनेक विषयों पर ग्रंथ रचे।
गुजरात के राजा कुमारपाल उनके शिष्य थे, जिनके मार्गदर्शन से राज्य में धर्म और संस्कृति
का उत्थान हुआ। आचार्य हेमचंद्र का संदेश है, ज्ञान, धर्म और नीति से समाज का कल्याण।

भगवती सूत्र जैन ज्ञान का महासागर

भगवती सूत्र जैन धर्म का अत्यंत विशाल और गहन आगम है।
इसमें भगवान महावीर और उनके गणधर गौतम स्वामी के संवाद संकलित हैं।
सूत्र में ब्रह्मांड, जीव, कर्म और मोक्ष के गूढ़ रहस्यों का विवेचन मिलता है।
इसका संदेश है, ज्ञान ही आत्मा का प्रकाश है और मोक्ष का मार्गदर्शक।

जैन आहार शास्त्र अहिंसा की थाली, आत्मा का पोषण

जैन आहार शास्त्र अहिंसा और संयम पर आधारित है।
यह शुद्ध, सात्विक और जीव-दया से युक्त भोजन का मार्गदर्शन करता है।
आहार केवल शरीर का पोषण नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का साधन है।
इसका संदेश है, करुणा और संयम से युक्त आहार ही मोक्षमार्ग का सहायक है।

उत्तम क्षमा धर्म क्रोध-विजय का महागुण

उत्तम क्षमा धर्म जैन परंपरा का महान गुण है।
यह क्रोध पर विजय पाकर आत्मा को शांति और समता प्रदान करता है।
क्षमा का अभ्यास अहिंसा, करुणा और आत्मशुद्धि की ओर ले जाता है।
इसका संदेश है, क्षमा से ही मोक्षमार्ग पर अग्रसर होना।

जिनवाणी का महत्व आत्मा की माँ, मोक्ष का द्वार

जिनवाणी जैन धर्म में आत्मा की माँ और मोक्ष का द्वार कही जाती है।
यह भगवान के उपदेशों और आगमों का दिव्य स्वरूप है।
जिनवाणी साधक को सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र की ओर मार्गदर्शन करती है।
इसका संदेश है, जिनवाणी के अध्ययन से आत्मा शुद्ध होकर मोक्षमार्ग पर अग्रसर होती है।