जिनवाणी जैन धर्म में आत्मा की माँ और मोक्ष का द्वार कही जाती है।
यह भगवान के उपदेशों और आगमों का दिव्य स्वरूप है।
जिनवाणी साधक को सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र की ओर मार्गदर्शन करती है।
इसका संदेश है, जिनवाणी के अध्ययन से आत्मा शुद्ध होकर मोक्षमार्ग पर अग्रसर होती है।
Library > जैन ज्ञान श्रृंखला
24 April, 2026
20 April, 2026
उत्तराध्ययन सूत्र भगवान महावीर की अंतिम वाणी का संकलन है।
इसमें पाँच प्रमुख जीवन-दर्शन बताए गए हैं, सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, संयम और क्षमा।
ये उपदेश आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग की ओर मार्गदर्शन करते हैं।
सूत्र का संदेश है कि धर्म का सार विनम्रता, करुणा और आत्मिक उत्थान में निहित है।
20 April, 2026
आयंबिल उपवास जैन धर्म की एक विशेष तपस्या है।
इसमें एक दिन केवल एक बार *रसायन-रहित*
(बिना नमक, तेल, मसाले, घी, दूध, दही आदि) भोजन लिया जाता है।
भोजन साधारण उबला हुआ होता है, जैसे दलिया, खिचड़ी या उबली हुई दाल।
09 March, 2026
चातुर्मास 2026 का आरंभ 15 जुलाई (देवशयनी एकादशी) से होगा
और समापन 12 नवम्बर (देवउठनी एकादशी) को होगा।
यह चार माह का पवित्र काल जैन परम्परा में वर्षायोग कहलाता है,
जिसमें साधु-साध्वियाँ स्थिरवास कर तप, संयम और स्वाध्याय में लीन रहते हैं।
09 October, 2025
नाकोड़ा भैरवजी की आराधना क्यों करनी चाहिए?
जानिए इस अनोखी परंपरा की संपूर्ण जानकारी
क्या आप जानते हैं कि राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित
एक छोटे से गांव में ऐसी दिव्य शक्ति विराजमान है |
14 October, 2022
जैन धर्म भारत में जन्मा एक प्राचीन धर्म है,
जो आध्यात्मिक शुद्धि और आत्मज्ञान का मार्ग सिखाता है।
इसके मूल सिद्धांत सभी जीवित प्राणियों के प्रति,
सख्त अनुशासन और पूर्ण अहिंसा पर केंद्रित हैं।

