जैन धर्म में पंचपरमेष्ठी पाँच सर्वोच्च पूज्य स्थान माने जाते हैं।
इनमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु सम्मिलित हैं।
ये पाँच परम पूज्य आत्मा को सम्यक मार्ग दिखाते हैं और मोक्ष की प्रेरणा देते हैं।
संदेश यही है, पंचपरमेष्ठी की वंदना से आत्मा शुद्ध होकर मोक्षमार्ग पर अग्रसर होती है।
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02 May, 2026
02 May, 2026
जैन कला और मूर्तिकला धर्म, दर्शन और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है।
मूर्तियों में तप, ध्यान और मोक्षमार्ग की गहन अभिव्यक्ति दिखाई देती है।
शिल्पकला में सूक्ष्मता, संतुलन और अहिंसा का भाव झलकता है।
संदेश यही है, जैन कला आत्मा की शुद्धि और अध्यात्मिक प्रेरणा का जीवंत प्रतीक है।
02 May, 2026
जैन धर्म में उपवास और आहार-शास्त्र आत्मा की शुद्धि का गहन विज्ञान है।
उपवास केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि इंद्रिय-विजय और आत्मनिरीक्षण का साधन है।
आहार-शास्त्र अहिंसा, संयम और सात्विकता पर आधारित है, जो आत्मा को शुद्ध करता है।
संदेश यही है, उपवास और शुद्ध आहार से आत्मा मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होती है।
28 April, 2026
प्रवचनसार आचार्य कुंदकुंद द्वारा रचित जैन धर्म का गहन आध्यात्मिक ग्रंथ है।
इसमें आत्मा के शुद्ध स्वरूप, कर्मबंधन और मोक्षमार्ग का विवेचन मिलता है।
ग्रंथ साधक को आत्मनिरीक्षण, सम्यक दर्शन और आत्मशुद्धि की ओर प्रेरित करता है।
संदेश यही है - आत्मा को पहचानो, कर्मों से मुक्त होकर मोक्ष की ओर बढ़ो।
28 April, 2026
प्रतिक्रमण जैन धर्म की दैनिक आत्मशुद्धि की साधना है। इसमें दिनभर के दोषों,
पापों और अशुद्धियों का आत्मावलोकन किया जाता है। विधि में अलोचना (स्वीकार),
प्रतिक्रमण (पश्चाताप), प्रत्याख्यान (भविष्य में त्याग का संकल्प) और क्षमा प्रमुख अंग हैं।
इसका संदेश है, आत्मनिरीक्षण और क्षमा से आत्मा को शुद्ध कर मोक्षमार्ग की ओर बढ़ना।
25 April, 2026
जैन आहार संस्कृति का मूल आधार है अहिंसा और जीव-दया।
हर थाली में करुणा, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश निहित होता है।
यह भोजन केवल शरीर का पोषण नहीं, बल्कि आत्मा की साधना का साधन है।
संदेश यही है, करुणा और संयम से युक्त आहार ही मोक्षमार्ग का सहायक है।
25 April, 2026
नवपद ओली जैन धर्म का महान तपोत्सव है।
यह 18 दिन की साधना आत्मशुद्धि और संयम का महापर्व है।
साधक नौ पदों, अरहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यक दर्शन,
सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र और तप का स्मरण करता है।
25 April, 2026
पर्युषण जैन धर्म का आत्मशुद्धि और तप का महापर्व है।
इसकी तैयारी बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि भीतर की साधना से होती है।
उपवास, स्वाध्याय और क्षमा इसका मुख्य आधार हैं। संदेश यही है,
आत्मा को शुद्ध कर मोक्षमार्ग पर अग्रसर होना।
25 April, 2026
आचार्य हेमचंद्र जैन धर्म के महान आचार्य और कलिकाल सर्वज्ञ कहलाए जाते हैं।
उन्होंने व्याकरण, साहित्य, दर्शन और राजनीति सहित अनेक विषयों पर ग्रंथ रचे।
गुजरात के राजा कुमारपाल उनके शिष्य थे, जिनके मार्गदर्शन से राज्य में धर्म और संस्कृति
का उत्थान हुआ। आचार्य हेमचंद्र का संदेश है, ज्ञान, धर्म और नीति से समाज का कल्याण।
24 April, 2026
भगवती सूत्र जैन धर्म का अत्यंत विशाल और गहन आगम है।
इसमें भगवान महावीर और उनके गणधर गौतम स्वामी के संवाद संकलित हैं।
सूत्र में ब्रह्मांड, जीव, कर्म और मोक्ष के गूढ़ रहस्यों का विवेचन मिलता है।
इसका संदेश है, ज्ञान ही आत्मा का प्रकाश है और मोक्ष का मार्गदर्शक।

