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Library > जैन ज्ञान श्रृंखला
जिनवाणी का महत्व आत्मा की माँ, मोक्ष का द्वार

जिनवाणी जैन धर्म में आत्मा की माँ और मोक्ष का द्वार कही जाती है।
यह भगवान के उपदेशों और आगमों का दिव्य स्वरूप है।
जिनवाणी साधक को सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र की ओर मार्गदर्शन करती है।
इसका संदेश है, जिनवाणी के अध्ययन से आत्मा शुद्ध होकर मोक्षमार्ग पर अग्रसर होती है।

उत्तराध्ययन सूत्र - महावीर की अंतिम वाणी के पाँच जीवन-दर्शन

उत्तराध्ययन सूत्र भगवान महावीर की अंतिम वाणी का संकलन है।
इसमें पाँच प्रमुख जीवन-दर्शन बताए गए हैं,  सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, संयम और क्षमा।
ये उपदेश आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग की ओर मार्गदर्शन करते हैं।
सूत्र का संदेश है कि धर्म का सार विनम्रता, करुणा और आत्मिक उत्थान में निहित है।

आयंबिल उपवास कैसे करें?

आयंबिल उपवास जैन धर्म की एक विशेष तपस्या है।  
इसमें एक दिन केवल एक बार *रसायन-रहित* 
(बिना नमक, तेल, मसाले, घी, दूध, दही आदि) भोजन लिया जाता है।  
भोजन साधारण उबला हुआ होता है, जैसे दलिया, खिचड़ी या उबली हुई दाल।  


चातुर्मास 2026

चातुर्मास 2026 का आरंभ 15 जुलाई (देवशयनी एकादशी) से होगा
और समापन 12 नवम्बर (देवउठनी एकादशी) को होगा।
यह चार माह का पवित्र काल जैन परम्परा में वर्षायोग कहलाता है,
जिसमें साधु-साध्वियाँ स्थिरवास कर तप, संयम और स्वाध्याय में लीन रहते हैं।

नाकोड़ा भैरवजी: जैन धर्म के अद्भुत रक्षक देव

नाकोड़ा भैरवजी की आराधना क्यों करनी चाहिए?
जानिए इस अनोखी परंपरा की संपूर्ण जानकारी
क्या आप जानते हैं कि राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित
एक छोटे से गांव में ऐसी दिव्य शक्ति विराजमान है |

नवकार मंत्र

नमो अरिहंताणं
नमो सिद्धाणं
नमो आयरियाणं
नमो उवज्झायाणं

जैनिज़्म

जैन धर्म भारत में जन्मा एक प्राचीन धर्म है, 
जो आध्यात्मिक शुद्धि और आत्मज्ञान का मार्ग सिखाता है। 
इसके मूल सिद्धांत सभी जीवित प्राणियों के प्रति,
सख्त अनुशासन और पूर्ण अहिंसा पर केंद्रित हैं।