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Library > जैन ज्ञान श्रृंखला
अहिंसा का जैन दर्शन - आचारांग सूत्र

अहिंसा का जैन दर्शन आचारांग सूत्र पर आधारित है
और इसे जैन धर्म की नैतिक नींव बताया गया है।
इसमें त्रिविध अहिंसा (मन, वचन, काया) और
नौ प्रकार की हिंसा का विस्तार से वर्णन है। 

कर्म सिद्धांत

कर्म सिद्धांत जैन दर्शन का मूल आधार है, जहाँ कर्म को दैवीय
न्याय नहीं बल्कि सूक्ष्म भौतिक कण माना गया है। यह आठ प्रकार
के कर्म आत्मा को जन्म-मृत्यु के चक्र में बाँधते हैं
और निर्जरा व मोक्ष ही मुक्ति का मार्ग बताते हैं।

चातुर्मास 2026

चातुर्मास 2026 का आरंभ 15 जुलाई (देवशयनी एकादशी) से होगा
और समापन 12 नवम्बर (देवउठनी एकादशी) को होगा।
यह चार माह का पवित्र काल जैन परम्परा में वर्षायोग कहलाता है,
जिसमें साधु-साध्वियाँ स्थिरवास कर तप, संयम और स्वाध्याय में लीन रहते हैं।

नाकोड़ा भैरवजी: जैन धर्म के अद्भुत रक्षक देव

नाकोड़ा भैरवजी की आराधना क्यों करनी चाहिए?
जानिए इस अनोखी परंपरा की संपूर्ण जानकारी
क्या आप जानते हैं कि राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित
एक छोटे से गांव में ऐसी दिव्य शक्ति विराजमान है |

नवकार मंत्र

नमो अरिहंताणं
नमो सिद्धाणं
नमो आयरियाणं
नमो उवज्झायाणं

जैनिज़्म

जैन धर्म भारत में जन्मा एक प्राचीन धर्म है, 
जो आध्यात्मिक शुद्धि और आत्मज्ञान का मार्ग सिखाता है। 
इसके मूल सिद्धांत सभी जीवित प्राणियों के प्रति,
सख्त अनुशासन और पूर्ण अहिंसा पर केंद्रित हैं।