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Library > जैन ज्ञान श्रृंखला
जैन आहार शास्त्र अहिंसा की थाली, आत्मा का पोषण

जैन आहार शास्त्र अहिंसा और संयम पर आधारित है।
यह शुद्ध, सात्विक और जीव-दया से युक्त भोजन का मार्गदर्शन करता है।
आहार केवल शरीर का पोषण नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का साधन है।
इसका संदेश है, करुणा और संयम से युक्त आहार ही मोक्षमार्ग का सहायक है।

उत्तम क्षमा धर्म क्रोध-विजय का महागुण

उत्तम क्षमा धर्म जैन परंपरा का महान गुण है।
यह क्रोध पर विजय पाकर आत्मा को शांति और समता प्रदान करता है।
क्षमा का अभ्यास अहिंसा, करुणा और आत्मशुद्धि की ओर ले जाता है।
इसका संदेश है, क्षमा से ही मोक्षमार्ग पर अग्रसर होना।

जिनवाणी का महत्व आत्मा की माँ, मोक्ष का द्वार

जिनवाणी जैन धर्म में आत्मा की माँ और मोक्ष का द्वार कही जाती है।
यह भगवान के उपदेशों और आगमों का दिव्य स्वरूप है।
जिनवाणी साधक को सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र की ओर मार्गदर्शन करती है।
इसका संदेश है, जिनवाणी के अध्ययन से आत्मा शुद्ध होकर मोक्षमार्ग पर अग्रसर होती है।

कल्पसूत्र जैन धर्म का पावन आगम

कल्पसूत्र आचार्य भद्रबाहु द्वारा रचित जैन धर्म का पवित्र आगम है।
इसमें भगवान महावीर के जीवन, उपदेश और निर्वाण का वर्णन है।
श्रावण मास और पर्युषण पर्व में इसका पाठ विशेष महत्व रखता है।
ग्रंथ का संदेश है, धर्मपालन, आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग की साधना।

नवपद / सिद्धचक्र नौ पदों की दिव्य आराधना

नवपद या सिद्धचक्र जैन धर्म की पवित्र आराधना है। इसमें नौ पदों
 अरहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान,
सम्यक चरित्र और तप – की पूजा होती है। यह साधक को आत्मशुद्धि, संयम
और धर्मपालन की ओर प्रेरित करता है। नवपद आराधना का संदेश है |

दस लक्षण पर्व आत्मशुद्धि का महापर्व

दस लक्षण पर्व जैन धर्म का महान आत्मशुद्धि और तपस्या का उत्सव है।
यह दस धर्मों – क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और 
ब्रह्मचर्य – का पालन कराता है। गृहस्थ और साधु-साध्वियाँ इस पर्व में उपवास, 
स्वाध्याय और साधना करते हैं। इसका संदेश है, आत्मा को शुद्ध कर मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होना।

जैन विवाह संस्कार एक पवित्र आत्मिक बंधन

जैन विवाह संस्कार केवल सामाजिक नहीं, बल्कि आत्मिक बंधन का प्रतीक है।
इसमें अहिंसा, सत्य और धर्मपालन को जीवन का आधार माना जाता है।
विवाह विधि में व्रत, मंत्रोच्चार और मंगलाचरण से पवित्रता स्थापित होती है।
इसका संदेश है, गृहस्थ जीवन को धर्म और मोक्षमार्ग से जोड़ना।

पंचास्तिकायसार - जैन ब्रह्मांड-विज्ञान का आधार

पंचास्तिकायसार आचार्य कुन्दकुन्द द्वारा रचित जैन ब्रह्मांड-विज्ञान का मूल ग्रंथ है।
इसमें जीव, धर्म, अधर्म, आकाश, और पुद्गल – पाँच अस्तिकायों का वर्णन है।
ये पाँच तत्व ब्रह्मांड की संरचना और जीवन के आधार माने जाते हैं।
ग्रंथ का संदेश है, आत्मा की शुद्धि और मोक्षमार्ग का वैज्ञानिक विवेचन।

जैन दीपावली - भगवान महावीर का निर्वाण और ज्ञान-प्रकाश का उत्सव

जैन दीपावली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस का पावन उत्सव है।
यह दिन आत्मा की मुक्ति और ज्ञान-प्रकाश का प्रतीक माना जाता है।
दीप जलाना आंतरिक ज्योति और आत्मिक शांति का स्मरण है।
इसका संदेश है, अज्ञान का अंधकार मिटाकर मोक्षमार्ग की ओर बढ़ना।

रत्नकरंड श्रावकाचार - आदर्श जैन गृहस्थ की संपूर्ण आचार-संहिता

रत्नकरंड श्रावकाचार आचार्य समन्तभद्र द्वारा रचित जैन धर्म का महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
यह आदर्श जैन गृहस्थ के लिए आचार-संहिता और जीवन-नीति का मार्गदर्शन करता है।
इसमें सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र को गृहस्थ जीवन में अपनाने की शिक्षा दी
गई है। ग्रंथ का सार है, संयम, अहिंसा और धर्मपालन से मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होना।