कल्पसूत्र आचार्य भद्रबाहु द्वारा रचित जैन धर्म का पवित्र आगम है।
इसमें भगवान महावीर के जीवन, उपदेश और निर्वाण का वर्णन है।
श्रावण मास और पर्युषण पर्व में इसका पाठ विशेष महत्व रखता है।
ग्रंथ का संदेश है, धर्मपालन, आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग की साधना।
Library > जैन ज्ञान श्रृंखला
24 April, 2026
23 April, 2026
नवपद या सिद्धचक्र जैन धर्म की पवित्र आराधना है। इसमें नौ पदों
अरहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान,
सम्यक चरित्र और तप – की पूजा होती है। यह साधक को आत्मशुद्धि, संयम
और धर्मपालन की ओर प्रेरित करता है। नवपद आराधना का संदेश है |
23 April, 2026
दस लक्षण पर्व जैन धर्म का महान आत्मशुद्धि और तपस्या का उत्सव है।
यह दस धर्मों – क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और
ब्रह्मचर्य – का पालन कराता है। गृहस्थ और साधु-साध्वियाँ इस पर्व में उपवास,
स्वाध्याय और साधना करते हैं। इसका संदेश है, आत्मा को शुद्ध कर मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होना।
23 April, 2026
जैन विवाह संस्कार केवल सामाजिक नहीं, बल्कि आत्मिक बंधन का प्रतीक है।
इसमें अहिंसा, सत्य और धर्मपालन को जीवन का आधार माना जाता है।
विवाह विधि में व्रत, मंत्रोच्चार और मंगलाचरण से पवित्रता स्थापित होती है।
इसका संदेश है, गृहस्थ जीवन को धर्म और मोक्षमार्ग से जोड़ना।
23 April, 2026
पंचास्तिकायसार आचार्य कुन्दकुन्द द्वारा रचित जैन ब्रह्मांड-विज्ञान का मूल ग्रंथ है।
इसमें जीव, धर्म, अधर्म, आकाश, और पुद्गल – पाँच अस्तिकायों का वर्णन है।
ये पाँच तत्व ब्रह्मांड की संरचना और जीवन के आधार माने जाते हैं।
ग्रंथ का संदेश है, आत्मा की शुद्धि और मोक्षमार्ग का वैज्ञानिक विवेचन।
21 April, 2026
जैन दीपावली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस का पावन उत्सव है।
यह दिन आत्मा की मुक्ति और ज्ञान-प्रकाश का प्रतीक माना जाता है।
दीप जलाना आंतरिक ज्योति और आत्मिक शांति का स्मरण है।
इसका संदेश है, अज्ञान का अंधकार मिटाकर मोक्षमार्ग की ओर बढ़ना।
21 April, 2026
रत्नकरंड श्रावकाचार आचार्य समन्तभद्र द्वारा रचित जैन धर्म का महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
यह आदर्श जैन गृहस्थ के लिए आचार-संहिता और जीवन-नीति का मार्गदर्शन करता है।
इसमें सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र को गृहस्थ जीवन में अपनाने की शिक्षा दी
गई है। ग्रंथ का सार है, संयम, अहिंसा और धर्मपालन से मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होना।
21 April, 2026
जैन धर्म में उपवास आत्मशुद्धि और संयम का साधन है।
एकासन, बियासन, उपवास, आयंबिल और मासखमण इसके
प्रमुख प्रकार हैं। हर उपवास इंद्रिय संयम और तपस्या का अभ्यास कराता है।
इनका उद्देश्य आत्मा को मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर करना है।
21 April, 2026
तत्त्वार्थ सूत्र आचार्य उमास्वाति द्वारा रचित जैन धर्म का मूल ग्रंथ है।
इसमें जीवन, कर्म, मोक्ष और धर्म के तत्त्वों का व्यवस्थित वर्णन किया गया है।
सूत्र का सार है, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र ही मोक्षमार्ग हैं।
यह ग्रंथ जैन दर्शन को तर्कसंगत और सार्वभौमिक रूप में प्रस्तुत करता है।
20 April, 2026
प्रेक्षा ध्यान आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा विकसित एक अद्वितीय ध्यान पद्धति है।
इसका उद्देश्य है, आत्मा की शुद्धि, मन की शांति और जीवन में समता का विकास।
यह ध्यान अनुप्रेक्षा (गहन चिंतन) और स्व-पर्यवेक्षण पर आधारित है।
विश्वभर में इसे शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उत्थान के साधन के रूप में अपनाया गया है।

