मैं सभी जीवों से क्षमा माँगता हूँ और सभी जीवों को क्षमा करता हूँ।
यह पाठ अहिंसा, करुणा और समता की भावना को प्रकट करता है।
क्षमा माँगना केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि हृदय की विनम्रता
और आत्मिक शुद्धि का अभ्यास है।
Library > जैन ज्ञान श्रृंखला
14 April, 2026
11 April, 2026
पर्युषण पर्व जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र महापर्व माना जाता है।
यह आत्मशुद्धि, तपस्या और क्षमा की साधना का विशेष अवसर है।
श्रद्धालु इस पर्व में उपवास, स्वाध्याय और सामायिक का पालन करते हैं।
पर्युषण का मुख्य संदेश है, क्षमा, करुणा और आत्मिक उत्थान की ओर अग्रसर होना।
11 April, 2026
लोगस्स स्तोत्र जैन धर्म का अत्यंत पवित्र स्तवन है, जिसमें 24 तीर्थंकरों की महिमा का वर्णन किया गया है।
यह स्तोत्र श्रद्धालुओं को समता, शांति और भक्ति की ओर प्रेरित करता है।
प्रत्येक तीर्थंकर की दिव्यता और उपदेश इसमें संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत हैं।
लोगस्स स्तोत्र का पाठ आत्मिक शुद्धि और मोक्षमार्ग की साधना का माध्यम माना जाता है।
08 April, 2026
उवसग्गहरं स्तोत्र जैन धर्म का अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तवन माना जाता है।
यह स्तोत्र उपसर्गों, संकटों और बाधाओं को दूर करने की साधना है।
श्रद्धालु इसे आस्था और भक्ति के साथ गाते हैं, जिससे आत्मबल और शांति प्राप्त होती है।
उवसग्गहरं स्तोत्र जीवन में सुरक्षा, साहस और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है।
08 April, 2026
अपरिग्रह जैन धर्म का प्रमुख सिद्धांत है, जो भौतिक वस्तुओं और आसक्तियों
से मुक्त रहने की शिक्षा देता है। यह दर्शन बताता है कि संग्रह और लालसा
ही दुख का कारण हैं। असंग्रह का अभ्यास मनुष्य को संतोष, शांति और
आत्मिक स्वतंत्रता की ओर ले जाता है।
08 April, 2026
जैन कर्म सिद्धांत आत्मा और कर्म के गहन संबंध को वैज्ञानिक दृष्टि से समझाता है।
यह बताता है कि प्रत्येक क्रिया और विचार आत्मा पर कर्म का बंधन उत्पन्न करता है।
कर्म सिद्धांत के अनुसार शुभ-अशुभ कर्म ही जन्म, जीवन और मोक्ष की दिशा तय करते हैं।
यह सिद्धांत आत्मा की शुद्धि और मुक्ति के मार्ग को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
08 April, 2026
स्याद्वाद जैन दर्शन का गहन सिद्धांत है, जो सशर्त कथन की पद्धति को समझाता
है। यह बताता है कि सत्य को अनेक दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है। हर कथन
सापेक्ष होता है और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। स्याद्वाद का अभ्यास
सहिष्णुता, विवेक और व्यापक दृष्टिकोण को जन्म देता है।
07 April, 2026
पंच कल्याणक जैन धर्म में तीर्थंकर के जीवन के पाँच दिव्य क्षणों का वर्णन है।
ये क्षण गर्भ, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान और मोक्ष के रूप में माने जाते हैं।
प्रत्येक कल्याणक आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक है।
पंच कल्याणक की साधना श्रद्धालुओं को मोक्षमार्ग की ओर प्रेरित करती है।
06 April, 2026
तत्त्वार्थ सूत्र आचार्य उमास्वाति द्वारा रचित जैन धर्म का मूल ग्रंथ है।
यह ग्रंथ जीवन, धर्म और मोक्ष के सिद्धांतों को सरल सूत्रों में प्रस्तुत करता है।
इसमें सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र का महत्व स्पष्ट किया गया
है। तत्त्वार्थ सूत्र को जैन दर्शन का सार्वभौमिक मार्गदर्शक माना जाता है।
06 April, 2026
सामायिक समता की साधना जैन धर्म में आत्मशुद्धि और संतुलन का महत्वपूर्ण अभ्यास है।
यह 48 मिनट की साधना साधक को समभाव, करुणा और आंतरिक शांति की ओर ले जाती है।
सामायिक के दौरान व्यक्ति सभी जीवों के प्रति समान दृष्टि रखता है और अहिंसा का पालन करता है।
यह साधना आत्मिक अनुशासन और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने का माध्यम है।

