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Library > स्तोत्र
उवसग्गहरं स्तोत्र उपसर्ग-नाशक जैन स्तवन

उवसग्गहरं स्तोत्र जैन धर्म का अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तवन माना जाता है।
यह स्तोत्र उपसर्गों, संकटों और बाधाओं को दूर करने की साधना है।
श्रद्धालु इसे आस्था और भक्ति के साथ गाते हैं, जिससे आत्मबल और शांति प्राप्त होती है।
उवसग्गहरं स्तोत्र जीवन में सुरक्षा, साहस और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है।

उवसग्गहरं स्तोत्र अर्थ सहित

उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्म-घण मुक्कं ।
विसहर विस णिण्णासं, मंगल कल्लाण आवासं ।।१।।
विसहर फुलिंगमंतं, कंठे धारेदि जो सया मणुवो ।
तस्स गह रोग मारी, दुट्ठ जरा जंति उवसामं ।।२।।

श्री पद्मावति स्तोत्र

पार्श्वनाथ भगवान को मन मंदिर में ध्याय
लिखने का साहस करूं चालीसा सुखदाय ।।१।।
उन प्रभुवर श्री पार्श्व की, यक्षी मात महान
पद्मावति जी नाम है, सर्व गुणों की खान ।।२।।

संतिकरं स्तोत्र

संतिकरं संतिजिणं, जगसरणं जय-सिरीइ दायारं।
समरामि भत्तपालग-निव्वाणी-गरुड-कयसेवं.. ||
ॐ सनमो विप्पोसहि-पत्ताणं संति-सामि-पायाणं।
झ्रौ स्वाहा-मंतेणं, सव्वासिव-दुरिअ-हरणाणं.. ||

श्री मंगलाष्टक स्तोत्र

अरिहंतो भगवत इन्द्रमहिताः, सिद्धाश्च सिद्धीश्वरा,
आचार्या: जिनशासनोन्नतिकराः, पूज्या उपाध्यायका:
श्रीसिद्धान्तसुपाठकाः, मुनिवरा रत्नत्रयाराधकाः,
पञ्चैते परमेष्ठिन: प्रतिदिनं, कुर्वन्तु नः मंगलम् ॥1।।

लघु शान्ति स्तोत्र

शान्तिं शान्ति-निशान्तं, शान्तं शान्ता-शिवं नमस्कृत्य.
स्तोतुः शान्ति-निमित्तं, मन्त्र-पदैः शान्तये स्तौमि........ .1. 
ओमिति निश्चित-वचसे, नमो नमो भगवतेर्हते पूजाम्.
शान्ति-जिनाय जयवते, यशस्विने स्वामिने दमिनाम्....... .2

श्री भक्तामर स्तोत्र

भक्तामर-प्रणत-मौलि-मणि-प्रभाणा-
मुद्योतकं दलित-पाप-तमो-वितानम् ।
सम्यक्-प्रणम्य जिन प-पाद-युगं युगादा-
वालम्बनं भव-जले पततां जनानाम् ॥1॥

श्री घंटाकर्ण महावीर स्तोत्र

ॐ घंटाकर्णो महावीरः सर्वव्याधि-विनाशकः।
विस्फोटक भयं प्राप्ते, रक्ष-रक्ष महाबलः ॥1॥
यत्र त्वं तिष्ठसे देव! लिखितोऽक्षर-पंक्तिभिः।
रोगास्तत्र प्रणश्यन्ति, वात पित्त कफोद्भवाः ॥2॥