जैन धर्म में अष्ट प्रकारी पूजा आठ अर्घ्यों से सम्पन्न होती है,
जल, चंदन, पुष्प, धूप, दीपक, नैवेद्य, फल और आरती।
हर अर्घ्य आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का प्रतीक है।
पूजा का उद्देश्य बाहरी अर्पणों के माध्यम से आंतरिक साधना को जागृत करना है।
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20 April, 2026
20 April, 2026
उत्तराध्ययन सूत्र भगवान महावीर की अंतिम वाणी का संकलन है।
इसमें पाँच प्रमुख जीवन-दर्शन बताए गए हैं, सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, संयम और क्षमा।
ये उपदेश आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग की ओर मार्गदर्शन करते हैं।
सूत्र का संदेश है कि धर्म का सार विनम्रता, करुणा और आत्मिक उत्थान में निहित है।
20 April, 2026
आयंबिल उपवास जैन धर्म की एक विशेष तपस्या है।
इसमें एक दिन केवल एक बार *रसायन-रहित*
(बिना नमक, तेल, मसाले, घी, दूध, दही आदि) भोजन लिया जाता है।
भोजन साधारण उबला हुआ होता है, जैसे दलिया, खिचड़ी या उबली हुई दाल।
15 April, 2026
जैन धर्म में 24 तीर्थंकरों की दिव्य महिमा का वर्णन किया गया है।
प्रत्येक तीर्थंकर ने मोक्षमार्ग का उपदेश देकर जीवों को सत्य और अहिंसा की ओर प्रेरित किया।
उनकी जीवनकथाएँ त्याग, तपस्या और करुणा का आदर्श प्रस्तुत करती हैं।
24 तीर्थंकरों की स्तुति आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की साधना का मार्ग प्रशस्त करती है।
15 April, 2026
पर्युषण पर्व जैन धर्म का सर्वोच्च और पवित्र उत्सव है।
यह आत्मशुद्धि, तपस्या और क्षमा का महापर्व माना जाता है।
श्रद्धालु इस दौरान उपवास, स्वाध्याय और सामायिक का पालन करते हैं।
पर्युषण का मुख्य संदेश है क्षमा, करुणा और आत्मिक उत्थान।
15 April, 2026
जैन धर्म में पाँच संकल्पों को जीवन का आधार माना गया है।
गृहस्थों के लिए अणुव्रत छोटे रूप में पालन किए जाते हैं।
साधुओं के लिए महाव्रत पूर्ण और कठोर रूप में निभाए जाते हैं।
दोनों ही मार्ग अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह पर आधारित हैं।
14 April, 2026
जैन ब्रह्मांड विज्ञान ब्रह्मांड को अनादि-अनंत मानता है।
यह दो भागों में विभाजित है, लोक और अलोक। लोक में ऊर्ध्वलोक,
मध्यलोक और अधोलोक तीन जगत आते हैं। अलोक शून्य और
अनंत विस्तार वाला क्षेत्र है, जहाँ कोई जीव या पदार्थ नहीं होता।
14 April, 2026
मैं सभी जीवों से क्षमा माँगता हूँ और सभी जीवों को क्षमा करता हूँ।
यह पाठ अहिंसा, करुणा और समता की भावना को प्रकट करता है।
क्षमा माँगना केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि हृदय की विनम्रता
और आत्मिक शुद्धि का अभ्यास है।
11 April, 2026
पर्युषण पर्व जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र महापर्व माना जाता है।
यह आत्मशुद्धि, तपस्या और क्षमा की साधना का विशेष अवसर है।
श्रद्धालु इस पर्व में उपवास, स्वाध्याय और सामायिक का पालन करते हैं।
पर्युषण का मुख्य संदेश है, क्षमा, करुणा और आत्मिक उत्थान की ओर अग्रसर होना।
11 April, 2026
लोगस्स स्तोत्र जैन धर्म का अत्यंत पवित्र स्तवन है, जिसमें 24 तीर्थंकरों की महिमा का वर्णन किया गया है।
यह स्तोत्र श्रद्धालुओं को समता, शांति और भक्ति की ओर प्रेरित करता है।
प्रत्येक तीर्थंकर की दिव्यता और उपदेश इसमें संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत हैं।
लोगस्स स्तोत्र का पाठ आत्मिक शुद्धि और मोक्षमार्ग की साधना का माध्यम माना जाता है।

