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परम हर्ष पामु वैराग्य

param harsh pamu vairagya, Param harsh


छो मारा ... सहारा ... गुरुमाँ .... आ .. आ ..
वैराग्य स्पर्श परम, भक्ति योग परम,
निजानंद संयम मयि परम हर्ष पामे परम ...

दुःख जाशे, सुख थाशे, प्रभु आज्ञा 
रोमे रोमे वेहता वेहता परम हर्ष छलकाशे ....
सुख संयमनु वाल्हु वाल्हु, देजो ओघो नीज ने भारूं॥।
गुरुमाँ ... ओ गुरुमाँ परम जेवो पामु वैराग्य।
वैराग्य, वैराग्य यशो कृपा थी पामु वैराग्य।।

वैराग्य गुलशना, मग मगता उपवनमा,
गुनोंनी सुगंधमानी। कृपाथी हो तारी, 
पामु प्रभु यारी, चालिश संयम सवारी।।
अनहद ....... आनंद ...... जे आपे .....
पामु रजोहरण आजे।।

 

Source - Param Harsh Paamu Vairagya | Manan Sanghvi | Khushi Tater

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