विर्तिनी वाटे चाल्या,
राजीमती ने नेमजी
सामु जोइने स्वामी,
मन लोभावो प्रेमथी (2)


जनमारो सफल कर्यो ने,
तार्या अनेको ने
सिद्ध बनी साधना थी,
बनाव्या सिद्ध अनेको ने (2)
धन्य धन्य नेमि तुझने,
विरति तारी भेट धरी
विर्तिनी वाटे चाल्या,
राजीमती ने नेमजी (2)


घणी वातो बाकी छे,
कोणे जाइने कहवी?
मारी साथे प्रीत बांधावो,
राजुलरानी जेव्वी (2)
नवभावनी प्रीतनी जेम,
प्रीत करू गहरी
विर्तिनी वाटे चाल्या,
राजीमती ने नेमजी (2)


मार्ग ते स्विकार्यो ते,
मार्ग कल्याणी बनशे
आत्माओ संचारशे ने,
आत्मा अनंत तर्षे (2)
तारी पासे आवुं छुं हुं,
तारो श्रृंगार करी
विर्तिनी वाटे चाल्या,
राजीमती ने नेमजी (2)


Source: Sahil Dharu