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    तेरी मिट्ठी | मेरे गुरु | जैन सॉन्ग

    ओ मेरे गुरु अफ़सोस नहीं , जो तेरे लिए १०० दर्द सहे मेह्फूस रहे तेरी जान सदा , चाहे जान मेरी यह रहे न रहे

    तेरी मिट्ठी | मेरे गुरु | जैन सॉन्ग

     

    ओ मेरे गुरु अफ़सोस नहीं , जो तेरे लिए १०० दर्द सहे

    मेह्फूस रहे तेरी जान सदा , चाहे जान मेरी यह रहे न रहे

    ओ मेरे गुरु सबकुछ मेरे , मेरी नस नस में नवकार बहे

    फीका न पड़े यह धर्म मेरा , जिस्मो से निकल के खून कहे

    तेरे संग संग मैं चल जावा , गुल बनके मैं खिल जावा

    इतनी सी है दिल की आरज़ू , तेरे दर्दो को सेह जावा

    तेरे पैरों में बिच जावा , इतनी सी है दिल की आरज़ू

    ओ हो ओ ओ ओ हो ....(२)

    पैरों से निकलते खून बहे , फिर भी न कोई एक शब्द कहे

    आबाद रहे यह धर्म मेरा , जिनशासन की यह आन रहे

    गुरुवार मेरे गुरुवार मेरे , मुझपे उपकार निराला था

    कुरबान होगये बेवजा , वो जैन धर्म का सितारा था

    तेरे संग संग मैं चल जावा , गुल बनके मैं खिल जावा

    इतनी सी है दिल की आरज़ू , तेरे दर्दो को सेह जावा

    तेरे पैरों में बिच जावा , इतनी सी है दिल की आरज़ू

    ओ हो ओ हो ओ हो ओ हो ...(२)

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