Thursday, 24 September, 2026
संसार-दावा-नल-दाह-नीरं,
संमोह-धूली-हरणे समीरं.
माया-रसा-दारण-सार-सीरं,
नमामि वीरं गिरि-सार-धीरं ... 1
भावा-वनाम-सुर-दानव-मानवेन,
चूला-विलोल-कमला-वलि-मालितानि.
संपूरिता-भिनत-लोक-समीहितानि,
कामं नमामि जिनराज-पदानि तानि ... 2
बोधागाधं सुपद-पदवी-नीर-पूराभिरामं,
जीवा-हिंसा-विरल-लहरी-संगमा-गाह-देहं.
चूला-वेलं गुरु-गम-मणी-संकुलं दूर-पारं,
सारं-वीरा-गम-जल-निधिं सादरं साधु सेवे ... 3
आमूला-लोल-धूली-बहुल-परि-मला-लीढ-लोलालि-माला-,
झंकारा-राव-सारा-मल-दल-कमला-गार-भूमी-निवासे !.
छाया-संभार-सारे! वर-कमल-करे! तार-हाराभिरामे!,
वाणी-संदोह-देहे! भव-विरह-वरं देहि मे देवि! सारम् ... 4
Source: Paryushan | Stotra


