आरती बाड़ा के पद्मप्रभु के चरणों की


करूँ आरती बाड़ा के श्री पद्मप्रभु के चरणों की।
दुख विनाशाये सुख उपजावे बेड़ी काटे कर्मों की।।
नींव खोदत प्रकट भये प्रभु इस बाड़ा की भूमी से।
चमत्कार दिखलाया ऐसा संकट हरता रोगी से।
रोता आये हँसता जाये अद्भुत महिमा चरणों की।
करू आरती बाड़ा के श्री पद्मप्रभु के चरणों की।
दुख दिनाशाबे सुख उपजावे बेड़ी काटे कर्मों की।।


तरह तरह के दुखिया आवे लगता चरणों में दरबार।
दढ श्रद्धा जिनकी होती है पहले वे पाते उपचार।।
जय जयकार बोलते प्रभुजी साता आयी कर्मों की
करेूँ आरती बाड़ा के श्री पद्मप्रभु के चरणों की।
दुख विनाशाबे सुख उपजावे बेड़ी काटे कर्मों की।।
शांति छवि है मूरत ऐसी मन नहीं भरता दर्शन से।
धन्य धन्य वह कलाकार जिन घड़ी है अपने हस्थन से।
मनवांछित फल पाकर लेते रज मस्तक पर चरणों की।
करू आरती बाड़ा के श्री पराप्रभु के चरणों की।
दुख बिनाशाबे सुख उपजावे बेड़ी काटे कर्मों की।।


वीतराग निर्गन्थ दिगम्बर राग द्वेष का लेश नहीं।
भक्त आपका कष्ट उठाये क्षेत्रपाल को रुचे नहीं।
'शिखर' बसा मन नाम आपका बलिहारी हे चरणों की।
करूँ आरती बाड़ा के श्री पद्मप्रभु के चरणों की।
दुख विनाशाबे सुख उपजावे बेड़ी काटे कर्मों की।