छूटे भले प्राणों पण दादा आ छूटे नहीं, हले भले दुनिया सारी,
मनने बंधाणी ने तन्ने गुंठाणी, दादा केरी प्रीती,
वाहला अंतरिक्ष दादा, बोलो बे घड़ी ...
वाहला अंतरिक्ष दादा, बोलो बे घड़ी ...
हवे रहेवाय ना, जाजू सेहवाय ना
आ, बस करो ने सजाणी ...
वाहला अंतरिक्ष दादा, बोलो बे घड़ी ...
वाहला अंतरिक्ष दादा, बोलो बे घड़ी ...


सहुणा दिली मां आजे, दर्द भराय छे थोड़ी, हमदर्दी तो बताओ,
आंखे आंसूडा ना, धोथ बहाय छे तमे, हवे तो काई पिंजाओ,
आंसू कहेता रे आ तो एनी, सुने रे जरा तो
एतो, जुरे छे जरी रे जरी ...
वाहला अंतरिक्ष दादा, बोलो बे घड़ी ...
वाहला अंतरिक्ष दादा, बोलो बे घड़ी ...


अंतरिक्ष सहुने प्यारा, अंतरिक्ष सहुशी न्यारा
अंतरिक्ष कामणगारो, चालो अंतरिक्षजी ...


रातां नी रातो, कर्त्ता रहू वातो एवं, कंई दिन वनो धवरक,
कोई कहे पागलपन नी छे भावो एनी, कंई नशी रे परवाव तो,
तारो मारो रे नातो टूटे ना कदा तो
एनी, घुमवीदे जाजूडी छड़ी ...
वाहला अंतरिक्ष दादा, बोलो बे घड़ी ...
वाहला अंतरिक्ष दादा, बोलो बे घड़ी ...



Source: Bhavik Shah