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Library > जैन धर्म दर्शन
क्षमावाणी - पर्युषण की क्षमा का सम्पूर्ण दर्शन

पर्युषण का सार है आत्मशुद्धि और क्षमा।
क्षमावाणी में हम अपने द्वारा किए गए दोषों और अपराधों के लिए क्षमा माँगते हैं।
यह अहिंसा, करुणा और समता का अभ्यास है, जो आत्मा को हल्का करता है।
संदेश यही है, क्षमा से ही क्रोध, द्वेष और कर्मबंधन का अंत होता है।

जैन कंदमूल निषेध - आलू, प्याज, लहसुन क्यों नहीं?

जैन धर्म में कंदमूल (जड़ वाली सब्जियाँ) जैसे आलू, प्याज और लहसुन का सेवन निषिद्ध है।
इनमें अनगिनत सूक्ष्म जीव रहते हैं, जिन्हें उखाड़ने पर हिंसा होती है।
इनका सेवन इंद्रियों को उत्तेजित करता है और साधना में बाधा डालता है।
संदेश यही है, अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि के लिए कंदमूल का त्याग आवश्यक है।

रात को खाना क्यों नहीं? जैन रात्रि भोजन त्याग का सम्पूर्ण दर्शन

जैन धर्म में रात्रि भोजन त्याग का गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है।
अंधकार में सूक्ष्म जीव अधिक सक्रिय रहते हैं, जिससे भोजन में हिंसा की संभावना बढ़ जाती है।
रात्रि भोजन आलस्य, रोग और मन की अशुद्धि को बढ़ाता है।
संदेश यही है, संयम, स्वास्थ्य और आत्मशुद्धि के लिए रात्रि भोजन का त्याग आवश्यक है।

जीव का जैन स्वरूप, मैं कौन हूँ?

जैन दर्शन में जीव का स्वरूप शुद्ध, चेतन और अनादि-अनंत माना गया है।
जीव का असली स्वरूप है, ज्ञान, दर्शन और आनंद।
कर्मों के बंधन से जीव संसार में भटकता है, परंतु उसका स्वभाव मोक्ष की ओर है।
संदेश यही है, “मैं शरीर नहीं, मैं शुद्ध आत्मा हूँ।”

वीरायतन

वीरायतन जैन धर्म का पवित्र संस्थान है जो सेवा, शिक्षा और साधना को समर्पित है।
यहाँ समाजसेवा, स्वास्थ्य और शिक्षा के माध्यम से धर्म का व्यावहारिक रूप प्रस्तुत किया जाता है।
साधना और आध्यात्मिकता के द्वारा आत्मिक शांति और मोक्षमार्ग की प्रेरणा दी जाती है।
वीरायतन का संदेश है, धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि सेवा और साधना का जीवन है।

चातुर्मास क्या है? जैन धर्म का पवित्र वर्षा विराम

चातुर्मास जैन धर्म का पवित्र वर्षा-विराम काल है।
यह चार महीने का समय साधु-साध्वियों के लिए स्थिर रहकर साधना करने का अवसर होता है।
गृहस्थ भी इस अवधि में उपवास, स्वाध्याय और तपस्या का पालन करते हैं।
चातुर्मास का मुख्य संदेश है आत्मशुद्धि, संयम और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होना।

घर में कितनी बड़ी प्रतिमा रखनी चाहिए?

कुछ महीने पहले, राजेश जी ने अपने घर के लिए एक
शानदार तीर्थंकर प्रतिमा खरीदी। दो फुट ऊंची,
सफेद मार्बल की, सोने के जड़ाव से सजी हुई देखकर मन प्रसन्न हो जाता था।
उन्होंने सोचा, "जितनी बड़ी प्रतिमा, उतनी बड़ी भक्ति!"

क्यों अपने घरों और दुकानों में घंटाकर्ण महावीर स्वामी की मूर्ति/फ्रेम होनी चाहियें?

भारतीय संस्कृति और विशेषकर जैन धर्म में, देवी-देवताओं की उपस्थिति हमारे दैनिक जीवन को सकारात्मक ऊर्जा और
सुरक्षा प्रदान करने का विशेष साधन मानी जाती है। घंटाकर्ण महावीर स्वामी जैन समुदाय के लिए संकटमोचक और रक्षक देवता
के रूप में पूजनीय हैं। आज जानिए, क्यों हर जैन परिवार को अपने घर और दुकान के मुख्य द्वार पर
घंटाकर्ण महावीर स्वामी की मूर्ति या फ्रेम जरूर लगानी चाहिए।

सामायिक के ३२ दोष

सामायिक को दूषित करने वाले कुल 32 दोष हैं,
जिनमें 10 मन के, 10 वचन के, और 12 काया के दोष शामिल हैं।
इन कार्यों से बचकर ही सामायिक की शुद्धता बनी रहती है,
जिससे यह धार्मिक क्रिया प्रभावी और फलदायी हो सके।

सामायिक क्या है?

सामायिक जैन धर्म की एक धार्मिक विधि है,
जिसमें सभी पाप कर्मों का त्याग किया जाता है।
जहाँ गुरु महाराज जीवन भर इसकी साधना करते हैं,
वहीं गृहस्थों के लिए यह ४८ मिनट का आत्म-शुद्धि का अभ्यास है।