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Library > प्रभु भक्ति
कभी प्यासे को पानी
कभी प्यासे को पानी

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा ।
कभी गिरते हुए को उठाया नहीं बाद आंसू बहाने से क्या फायदा ।।
कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।।
मैं तो मंदिर गया पूजा आरती की पूजा करते हुए ये ख्याल आ गया ।

आज नहीं तो कल जाना है
आज नहीं तो कल जाना है

Aaj Nahin To Kal Jana Hai

 

 

...
मेरे दोनों हाथो में ऐसी लकीर है
मेरे दोनों हाथो में ऐसी लकीर है

मेरे दोनो हाथो में, ऐसी लकीर है,
दादा से मिलन होगा, मेरी तकदीर है,
लिखा है ऐसा लेख दादा, लिखा है ऐसा लेख,
लिखा है ऐसा लेख दादा, लिखा है ऐसा लेख।।

हे उपकारी कृपा वरसावो
हे उपकारी कृपा वरसावो

हे उपकारी! कृपा वरसावो..सिद्धशीलाए मने तेडावो
राह जोउं…राह जोउं, प्रभु आवशे ने लइ जाशे... (२)
प्रभु आवशे ने लइ जाशे…प्रभु आवशे ने लइ जाशे
जन्मोनी प्रीति मारी आंखो बोले, आंसुओना सागर छलके

नाम है तेरा तारण हारा
नाम है तेरा तारण हारा

नाम है तेरा तारण हारा
कब तेरा दर्शन होगा
जिनकी प्रतिमा इतनी
सुंदर वो कितना सुंदर होगा

शांतिनाथ को कीजे जाप
शांतिनाथ को कीजे जाप

શાંતિનાથનો કીજે જાપ, ક્રોડ ભવોનાં કાપે પાપ
શાંતિનાથજી મ્હોટા દેવ, સુરનર સારે જેહની સેવ...૧
દુઃખ દારિદ્ર જાવે દૂર, સુખ સંપત્તિ હોવે ભરપૂર
ઠગ ફાંસીગર જાવે ભાગ, બળતી હોવે શીતળ આગ...૨

तू मने भगवान
तू मने भगवान

तू मने भगवान एक वरदान आपी दे,
ज्या वसे छे तु मने त्या स्थान आपी दे...(2)
हु जिवु छु ऐ जगतमा ज्या नथी जीवन,
जिंदगी नु नाम छे बस बोझ ने बंधन,

दुनिया से मैं हारा
दुनिया से मैं हारा

दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहां से गर जो हारा, कहां जाऊंगा सरकार।
सुख में प्रभुवर तेरी याद ना आयी,
दुःख में प्रभुवर तुमसे प्रीत लगाई।

मेरी भावना

जिसने राग द्वेष कामादिक जीते सब जग जान लिया
सब जीवोको मोक्षमार्ग का निस्पृह हो उपदेश दिया
बुध्ध, वीर, जिन, हरि, हर, ब्रम्हा, या उसको स्वाधीन कहो
भक्ति-भाव से प्रेरित हो यह चित्त उसी में लीन रहो ||1||