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Library > प्रभु भक्ति
प्रभु तमारा पगले पगले

प्रभु तमारा पगले पगले पा पा पगली मांडी छे,
हवे तो अक्षर पाडो हरिवर, मारी कोरी पाटी छे, (2)
बाळक छुं हुं मने खबर क्यां...
शुं छे साचुं जीवन?

दादा तेरी तस्वीर
दादा तेरी तस्वीर

दादा तेरी तस्वीर सिरहाने रखकर सोते हैं,
यही सोचकर अपने दोनों नैन भीगोते है,
कभी तो तस्वीर से निकलोगे,
कभी तो भेरू दादा पिघलोगे....

आव्यो शरणे तमारा जिनवर

आव्यो शरणे तमारा जिनवर करजो आश पूरी अमारी 
नाव्यो भवपार मारो तुम विण जगमां सार ले कोण मारी 
गायो जिनराज आजे हरख अधिकथी परम आनंदकारी 
पायो तुम दर्श नासे भव-भय-भ्रमणा नाथ सर्वे अमारी

गौतम स्वामी स्तवन
गौतम स्वामी स्तवन

वीर जिनेश्वर केरो शिष्य, 
गौतम नाम जपो निशदिन, 
जो कीजे गौतम नुं ध्यान, 
तो घर विलसे नवे निधान...||1||

श्री गौतमस्वामी जी का रास

वीर जिणेसर चरण कमल, कमला कय वासो, 
पणमवि पभणिसुं सामीसाल, गोयम गुरु रासो 
मण तणु वयण एकंत करवि, निसुणहु भो भविया ॥ 
जिम निवसे तुम देह गेह गुण गण गहगहिया ॥ 1 ॥ 

दीपावली स्तवन

मारग देशक मोक्षनो रे केवल ज्ञान निधान । 
भाव दया सागर प्रभु रे पर उपगारी प्रधानो रे । 
वीर जिन सिद्ध थया, संग सकल आधारो रे 
हिव इन भरत मां, कुण करस्ये उपगारो रे । 

कुशल करना.. कुशल करना..

कुशल करना कुशल करना, कुशल गुरुराज शासन में। 
तुम्हीं हो शक्तिमय निज भक्त, विघ्नों के विनाशन में ||
महा अन्धेरे में सोते, निरख लो अपने भक्तों को। 
उठाकर आप अब जल्दी, लिवा लाओ प्रकासन में ||

कोई दीजो रे संदेश

कोई दीजो-3 रे संदेश, म्हारा गुरुवर ने संदेश, 
हिवड़े कुशल सूरी बस जाए... 
अंखियां छम-छम आंसू बरसे, म्हारा नैन मिलन ने तरसे 
दर्शन दीजो रे...2 गुरुदेवऽऽऽ-2

अजमेर का एक सितारा

अजमेर का एक सितारा, चमका था आकाशों में 2 
जैन संघ का बना था नायक, देखा सारे भक्तों ने ॥ध्रुव।। 
था वो मसीहा इस दुनिया का, कोई कैसे भुलायेगा, 
हरपल हर घड़ी इस मूरत को, इन नैनों में बसायेगा, 

नन्हा सा फूल हूं मैं

नन्हा सा फूल हूँ मैं 
चरणों की धूल हूँ मैं 
आया हूँ मैं तो तेरे द्वार, 
प्रभुजी मेरी पूजा करो स्वीकार