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Library > प्रभु भक्ति
गाओ मिलकर सारे

गाओ मिलकर सारे 2 
वीर प्रभु के चरण कमल में गुंजे गाण हमारे 
गाओ गाओ गुण गाओ रे.......  
भाव भक्ति से प्रेरित होकर, मनुआ गुण गुण गाये,

भजन

मैली चादर ओढ़ के कैसे, द्वार तुम्हारे आऊ 
हे पावन परमेश्वर मेरे मन ही मन शरमाऊ 
तु ने मुझको जग में भेजा, निर्मल देकर काया 
आकर के संसार में मैंने इसको दाग लगाया 

नही सुमिरन करे, नही ध्यान लगाये

नही सुमिरन करे, नही ध्यान लगायें 
प्रभू कैसे पार लगाये 
रे भज मन विर प्रभू के, सुमिरन विर प्रभू के 2 
शुद्ध मन से कभी न नीज को ध्यासा 

पंछी उड जायेगा.

पंछी उड जायेगा होते ही भोर 
पल में कट जायेंगी सांसों की ये डोर 
अवसर के रहते ही चाहे कुछ भी सीख 
तुझको जग जाना है निंदयों को झकझोर 

कदम कदम पर मोहे करम सताये

कदम कदम पर मोहे करम सताये
करम सताये हमें चैन न आय ...
इक तो प्रभुजी मोहे कर्म सतायें, लाख चोरासी भ्रमण कराये 
भ्रमण कराये स्वामी बड़ा तड़फाये रे ...

मन की लगन अब यहाँ

मन को लगन अब यहाँ 
जायेगा अब तू कहा 
मन में बसाले, दिल में छुपाले 
प्रभु की मूरत यहां 

उठ जा ओ सोये मानव

उठा जा ओ सोये  मानव उठ जा 
कौन है ठिकाना जीवन का 
फल में यहां से चला जायेगा 
हवा में क्यों उड़ जाय तिनका 

 

यह चादर भई पुरानी

यह चादर भई पुरानी, तू सोच समझ अभिमानी 
टुकड़े-टुकड़े जोरि जुगत सो, 
सींक अंग लपटानी। 
कर डारी मैलो पापन सौ,

प्रभु से कोई कह दे

प्रभु से कोई कह दे, कि तेरे रहते-रहते 
अंधेरा हो रहा, कि तुम हो वहां, तो मिलने को यहाँ 
कि भक्त गा रहा-प्रभु से 
फंसा हूं में कर्मों से,

नवकार गीत

महामंत्र हैं कैसा सुहाना 
अब गीत इसी के गाना 
मंत्र महासुखकारी है 
शुद्ध मन से ध्यान लगाना