ऋषभजी बोलावे छे, एना सपना आवे छे
जे एना थई जावे छे, एना ए थई जावे छे.
ऋषभजी बोलावे छे ...
सपनामां एनाथी वातो थाय; आंख खूले त्यां सौ पहेला देखाय,
Library > शत्रुंजय स्तवन
01 October, 2026
01 October, 2026
लागी रे लागी रे लागी -3
लागी रे लागी रे लागी-3
लागी लगनवा छोड़ी न छुटे,
ऋषभ जिनन्द दयाल हो मोरी लागी लगनवा
15 June, 2026
आदिनाथ प्रभु हर रूप में मिल जाते हैं, मौन, आहट या मुस्कान में।
जीवन कर्मों की खेती है, जो बोएगा वही काटेगा।
नेकी बाँटने वाला स्वयं भी सुगंधित होता है।
सच्चा तीर्थ बाहर नहीं, भीतर की श्रद्धा और साधना में है।
28 June, 2025
लागी रे लागी रे लागी -3
लागी रे लागी रे लागी-3
लागी लगनवा छोड़ी न छुटे,
ऋषभ जिनन्द दयाल हो मोरी लागी लगनवा
28 June, 2025
आदीनाथा मेरी अरदास है
तेरे दर्शन की प्यास है हो ... तेरे दर्शन की प्यास है
तू मेरी सांसे तू मेरी धड़कन
तेरे चरणो मे मै हूं अर्पण
28 June, 2025
चाँद सितारे फूल और खुशबू ... (2)
ये तो सारे पुराने हैं,
शत्रुंजय में सजके बैठा,
हम उसके दीवाने हैं।
28 June, 2025
ऋषभजी बोलावे छे, एना सपना आवे छे
जे एना थई जावे छे, एना ए थई जावे छे.
ऋषभजी बोलावे छे ...
सपनामां एनाथी वातो थाय; आंख खूले त्यां सौ पहेला देखाय,
27 June, 2025
गिरिराज ... आदिनाथ ...
बैठे है ... मेरे भीतर में ... (3)
तीर जाऊ में भव समंदर से,
तीर जाऊ में भव समंदर से
27 June, 2025
सिद्धाचल दरबार झाझरमान लागे छे,
राजा ऋषभ देव महरबान लागे छे।
आज अनंता सिद्धोंनो एहसान लागे छे,
शाश्वत सुखना अही सम्मान लागे छे।
26 June, 2025
शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन को, करुं प्रणाम |
उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम ||
सर्व साधु और सरस्वती जिन मन्दिर सुखकार |
आदिनाथ भगवान को मन मन्दिर में धार ||

