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    दुनिया से मैं हारा

    दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार, यहां से गर जो हारा, कहां जाऊंगा सरकार ।


    दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
    यहां से गर जो हारा, कहां जाऊंगा सरकार ।

    सुख में प्रभुवर तेरी याद ना आयी,
    दुःख में प्रभुवर तुमसे प्रीत लगाई ।
    सारा दोष हैं मेरा, मैं करता हूं स्वीकार,
    यहां से गर जो हारा, कहां जाऊंगा सरकार ॥
     
    दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार….
     
    मेरा तो क्या हैं, मैं तो पहले से हारा,
    तुमसे ही पूछेगा ये संसार सारा ।
    डूब गई क्यों नैय्या, तेरे रहते खेवनहार,
    यहां से गर जो हारा, कहां जाऊंगा सरकार ॥
     
    दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार….
     
    सबकुछ लुटा है, बस लाज बची हैं,
    तुमपे ही दादा मेरी आस बंधी हैं ।
    सुना हैं तुम सुनते हो, हम जैसो की पुकार,
    यहां से गर जो हारा, कहां जाऊंगा सरकार ॥
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    Jai adinath _/\_