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Library > प्रभु भक्ति
ऐऊ मांगु छू

भक्ती करता छुटे म्हारा प्राण प्रभुजी ऐऊ मांगू छू 
रहे जन्म जन्म थारो साथ प्रभुजी ऐऊ मांगू छू !! 
यारो मुखड़ो मनोहर ज्योया करू 
रात दिवस रटन बारो करीया करू 

जीवन में हो ऐसी घडी

जीवन में हो ऐसी घड़ी
मन में बस जाये मुरत तेरी 2
ये जीवन है दर्शन का प्यासा
प्यास बुझती हैं कब तक मेरी 2

निश दिन सुमरो रे नवपद माला

निश दिन सुमरो रे नवपद माला
कर्म का टूटे पल में ताला ॥ धू ॥
सुमिरन इस जीवन में दुख हर लेगा। 
इक दिन चौरसी का सुख हर लेगा

माँ तू है सब देवो से बढ़कर

देखे है मैंने लाख बिछौने नरमी के
एक से एक बढ़कर,
सुलभ न हुआ कोई बिस्तर मेरी माँ
की गोद से बढ़कर

यह पर्व पर्यूषण

यह पर्व पर्यूषण जैनों का, अलबेलों का मस्तानों का,
इस धर्म का यारों २ क्या कहना, यह धर्म है जैनो का गहना,
हो हो ऽऽऽऽ हो ऽऽऽऽ 
यहाँ होती अठाई घर घर में, नित होती पूजा मंदिर में

अब हम जाते हैं घर....

अब हम जाते हैं घर, झुकाकर सर 
ओ दादा प्यारा, आशिष का करों इशारा ॥ 
दिल तो जाने को नहीं करता, पर गये बिना भी नहीं चलता,
अब करूं तो कौन उपाय नहीं कोई चारा, आशिष का करो इशारा

है ये पावन भूमि यहाँ बार-बार आना

है ये पावन भूमि, यहाँ बार-बार आना, 
गुरुदेव के चरणों में, आकर के झुक जाना,
है ये पावन भूमि …
तेरे मस्तक मुकुट है, तेरी अंगिया सुहानी है

साधना पाना नही जीवन को

पाना नही जीवन को बदलना है साधना,
धुएं सा जीवन मौत है २ऽऽऽ, जलना है साधना, 
पाना नही जीवन को…
मुंड मुंडाना बहुत सरल है, मन मुंडन आसान नहीं

माला गीत : सुबह और शाम की फेरो एक माला

सुबह और शाम की प्रभु जी के नाम की। 
फेरो एक माला, हो हो फेरो एक माला ॥ 
सकल सार नवकार मंत्र यह परमेष्ठि की माला, 
नरकादि दुर्गति का सचमुच जड़ देती है ताला

सुख शांति की पुरवईया चले

सुख शांति की पुरवईया चले।
घर-घर में मंगल दीप जले॥ 
शुभ भावनायें ये फूले फले।
घर-घर में मंगल दीप जले॥