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Library > जैन कहानियाँ
फागन फेरी की अद्भुत कहानी

फागन फेरी श्री शत्रुंजय गिरिराज पर फागन सुदी तेरस के दिन की जाने वाली छह गाऊं की पवित्र परिक्रमा है,
जो सांब और प्रद्युम्न मुनिराज की मोक्ष-प्राप्ति की स्मृति में लगभग ८४ हज़ार वर्षों से चली आ रही है।
इस लेख में रीटा और मीता की प्रेरणादायक कहानी के माध्यम से गिरिराज की
इस पावन यात्रा का महत्व सरल और भावपूर्ण रूप से प्रस्तुत किया गया है।

तेईसवें तीर्थंकर भगवान् पार्श्वनाथ

काशी में जन्मे पार्श्वनाथ का जीवन एक सर्प-घटना से शुरू हुआ,
उन्होंने तपस्वी कमठ की अग्नि से सर्प युगल को बचाया, जो बाद में धरणेन्द्र बने।
कमठ ने मेघमाली देव के रूप में पार्श्वनाथ को घोर उपसर्ग दिए,
किंतु वे अविचल रहे और सम्मेतशिखर पर मोक्ष प्राप्त कर अमर हुए।

राजा श्रीपाल

यह कथा सिद्धचक्र के महत्व को दर्शाती है। 
राजा श्रीपाल का कुष्ठ रोग सिद्धचक्र के आराधन से ठीक हो गया था, 
और उन्हें आठ पत्नियाँ, नौ पुत्र, प्रचुर धन-संपत्ति
तथा नौ वर्षों तक निष्कंटक राज्य प्राप्त हुआ।