यह “श्री दो प्रतिक्रमण सूत्र (हिंदी)” ग्रंथ विशेष रूप से उन श्रावक-श्राविकाओं के लिए तैयार किया गया है, जो प्रतिक्रमण की विधि को सरल भाषा में समझना और नियमित रूप से पालन करना चाहते हैं। इसमें सूत्रों के साथ हिंदी अर्थ भी दिए गए हैं, जिससे पाठ करते समय भाव और अर्थ दोनों स्पष्ट रूप से समझ में आते हैं। प्रतिक्रमण के माध्यम से व्यक्ति अपने द्वारा किए गए पापों का चिंतन, प्रायश्चित और आत्मशुद्धि करता है, और यह ग्रंथ उस प्रक्रिया को सही दिशा देने में सहायक बनता है। यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि दैनिक आत्मचिंतन और साधना का एक महत्वपूर्ण साधन है।