यह ग्रंथ जैन आगम साहित्य के चार छेद सूत्रों में से एक है, जिसमें साधु-साध्वी के आचार-शुद्धि और संयम जीवन के लिए विशेष विधान प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें दशा, कल्प और व्यवहार से संबंधित नियमों और अनुशासनों का सचित्र विवेचन किया गया है।
इस पुस्तक में रंगीन चित्रों के माध्यम से कठिन विषयों को सरल और रोचक शैली में समझाया गया है। साधु-साध्वी के संयम जीवन में आवश्यक आचार-विधि, उत्सर्ग, अपवाद और प्रायश्चित आदि का स्पष्ट वर्णन किया गया है।
यह ग्रंथ न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से मूल्यवान है, बल्कि स्वाध्याय, पाठशालाओं और ज्ञान शिविरों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। सचित्र प्रस्तुति इसे और अधिक आकर्षक और प्रेरणादायी बनाती है।