सचित्र श्री प्रश्नव्याकरण सूत्र प्रवर्तक श्री अमर मुनि द्वारा संकलित यह ग्रंथ जैन आगम साहित्य का दसवाँ अंग सूत्र है। इसमें आश्रव और संवर का विशेष विवेचन किया गया है, जो जैन दर्शन के मूलभूत सिद्धांतों में से हैं। इस ग्रंथ में बताया गया है कि किस प्रकार कर्मों का प्रवाह (आश्रव) होता है और उसे रोकने (संवर) के उपाय क्या हैं।
रंगीन चित्रों के माध्यम से कठिन दार्शनिक विषयों को सरल और रोचक बनाया गया है, जिससे पाठक को न केवल धार्मिक ज्ञान मिलता है बल्कि जीवन में संयम और विवेक का महत्व भी स्पष्ट होता है। यह पुस्तक साधकों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत उपयोगी है तथा स्वाध्याय, पाठशालाओं और ज्ञान शिविरों में अध्ययन हेतु श्रेष्ठ चयन है।