सचित्र श्री नन्दीसूत्र जैन आगम साहित्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें मतिज्ञान, श्रुतज्ञान सहित पाँचों ज्ञानों का विस्तारपूर्वक और सरल तरीके से वर्णन किया गया है। इस पुस्तक की खास बात यह है कि इसमें जटिल सिद्धांतों को भी चित्रों के माध्यम से सहज और समझने योग्य बनाया गया है। 469 पृष्ठों में प्रस्तुत यह ग्रंथ साधकों, विद्यार्थियों और जैन दर्शन में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति के लिए एक मूल्यवान अध्ययन सामग्री है।
मतिज्ञान-श्रुतज्ञान आदि पाँच ज्ञान का सर्वांग पूर्ण विवेचन चित्रों सहित ।