यह “सचित्र श्री कृष्ण पांडव पुराण” (भाग 1 एवं 2) जैन परंपरा में वर्णित महाभारत कथा को सरल और विस्तृत रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें श्री कृष्ण, पांडवों और अन्य पात्रों की कथा को जैन दृष्टिकोण से समझाया गया है, जिससे पाठक को धर्म, संयम और कर्म के सिद्धांतों की गहरी समझ मिलती है। 546 पृष्ठों का यह ग्रंथ चित्रों (सचित्र) के साथ होने के कारण पढ़ने में और भी रोचक और स्पष्ट बन जाता है। हिंदी भाषा में होने से यह सभी आयु वर्ग के लिए सुलभ है। Shree Diwakar Prakashan द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक स्वाध्याय, ज्ञानवृद्धि और धार्मिक समझ को मजबूत करने का एक उत्तम माध्यम है।