सचित्र श्री अनुयोगद्वार सूत्र (भाग 1 एवं 2) प्रवर्तक श्री अमर मुनि द्वारा संकलित यह ग्रंथ जैन आगम साहित्य का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें आगमों के अर्थ, अभिप्राय और व्याख्या शैली को समझने की कुंजी प्रदान की गई है। कठिन विषयों को सरल और रोचक बनाने के लिए रंगीन चित्रों का प्रयोग किया गया है, जिससे पाठक को गहन दार्शनिक विचार भी सहजता से समझ में आते हैं। दोनों भाग मिलकर अनुयोगों के द्वार खोलते हैं और जैन धर्म के गूढ़ सिद्धांतों को स्पष्ट करते हैं। यह पुस्तक स्वाध्याय, पाठशालाओं और ज्ञान शिविरों के लिए अत्यंत उपयोगी है तथा धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अमूल्य संग्रह है।